Siddha Yoga in Astrology: सिद्ध योग क्या होते हैं और ये हर काम में सफलता कैसे दिलाते हैं?

ज्योतिष शास्त्र में समय, योग और मुहूर्त का बहुत महत्व है। सही शुभ योग और मुहूर्त में किए गए कार्यों में सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है
विशेष नक्षत्र और वार से बनने वाले ये योग कार्यों में बाधाएँ दूर करते हैं और व्यक्ति को सकारात्मक परिणाम दिलाते हैं। ऐसे योग और पूजा सेवाएं Suvich App – The Real Astrology पर उपलब्ध हैं।

Astrology Tips: शुभ योग और सफलता के रहस्य

हम अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करने के बावजूद अपने काम में सफलता नहीं पाते। वहीं कुछ लोग सही समय पर शुरुआत करके बड़ी सफलता हासिल कर लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके पीछे शुभ योग और सही मुहूर्त का हाथ होता है। हिंदू ज्योतिष में कुछ विशेष नक्षत्र और वार (दिनों) बताए गए हैं, जिनमें शुरू किया गया कार्य कभी असफल नहीं होता।

ये शक्तिशाली योग न केवल बाधाओं को दूर करते हैं, बल्कि व्यक्ति को सकारात्मक परिणाम, समृद्धि और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, सर्वार्थ सिद्धि योग वह समय होता है जो आपके सभी उद्देश्यों और कार्यों को सफल बनाता है। यह योग तब बनता है जब किसी विशेष दिन निश्चित नक्षत्र और वार का संगम होता है। मान्यता है कि इस समय में किए गए शुभ कार्य बाधा रहित और पूर्णतया सफल होते हैं।

इन कामों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग सबसे अच्छा है

अगर आप नया व्यवसाय शुरू करने वाले हैं, नई नौकरी जॉइन कर रहे हैं या जमीन, मकान या गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो यह योग आपके लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, विदेश यात्रा के निर्णय के लिए भी इसे बहुत शुभ माना जाता है।


पुष्य नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह नक्षत्र पोषण, समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक है। पुराणों के अनुसार, धन की देवी माता लक्ष्मी का प्राकट्य इसी नक्षत्र में हुआ था। यही कारण है कि इस दौरान की गई खरीदारी लंबे समय तक शुभ फल देती है।

इन कामों के लिए शुभ: इस दिन सोना, चांदी या कीमती वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में शुरू किए गए काम में बरकत लंबे समय तक बनी रहती है।


रवि पुष्य योग

जब नक्षत्रों का राजा पुष्य और ग्रहों के राजा सूर्य का दिन यानी रविवार एक साथ आते हैं, तो रवि पुष्य योग बनता है। ज्योतिष में इसे अक्षय तृतीया या धनतेरस के समान ही फलदायी माना जाता है।

क्यों है सबसे शक्तिशाली: इसमें सूर्य की तेजस्विता और पुष्य नक्षत्र की स्थिरता का अद्भुत संगम होता है।

फायदा: यदि आप प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं, शेयर बाजार में पैसा लगाना चाहते हैं या कोई बड़ा आर्थिक लेनदेन करना चाहते हैं, तो रवि पुष्य योग से बेहतर समय नहीं है।


ज्योतिष में इन्हें क्यों माना जाता है अति शुभ

इन योगों को अति शुभ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा और कुंडली के छोटे-मोटे दोषों को कम करने की शक्ति रखते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इन मुहूर्तों में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जो मानवीय प्रयासों को ब्रह्मांडीय आशीर्वाद प्रदान करती है, जिससे सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है। Suvich – The Real Astrology इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता।

Vishal Dhiman

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