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Panchang 5 October 2026: दशमी श्राद्ध के साथ जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल

Panchang 5 October 2026: आज 5 अक्टूबर 2026, सोमवार के दिन आश्विन कृष्ण दशमी तिथि है। पितृ पक्ष के दौरान आज दशमी तिथि का श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा। इसके साथ ही आज पुष्य नक्षत्र, शिव योग और कई महत्वपूर्ण शुभ-अशुभ काल बन रहे हैं। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले आज का पंचांग देखना उपयोगी रहेगा। आइए जानते हैं 5 अक्टूबर 2026 का पूरा पंचांग, श्राद्ध के मुहूर्त, राहुकाल और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति।

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5 अक्टूबर 2026 का पंचांग

5 अक्टूबर 2026 को सोमवार है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना और भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है।

  • तिथि: आश्विन कृष्ण दशमी तिथि रात 02:07 बजे तक, इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी।
  • वार: सोमवार
  • नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र रात 11:09 बजे तक, इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा।
  • योग: शिव योग सुबह 09:51 बजे तक, इसके बाद सिद्ध योग रहेगा।
  • करण: वणिज दोपहर 02:59 बजे तक, इसके बाद विष्टि करण रात 02:07 बजे तक रहेगा। इसके बाद बव करण शुरू होगा।

पितृ पक्ष में दशमी तिथि पर पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए पितृ कर्म से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

5 अक्टूबर 2026 को दशमी श्राद्ध

आज आश्विन कृष्ण दशमी तिथि होने के कारण दशमी श्राद्ध किया जाएगा। पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने के लिए दिन के विशेष काल को महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्राद्ध और तर्पण के शुभ समय

  • कुतप काल: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 01:23 बजे तक
  • रौहिण काल: दोपहर 12:33 बजे से दोपहर 01:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 01:20 बजे से दोपहर 03:41 बजे तक

पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि का पालन करना उचित माना जाता है।

5 अक्टूबर 2026 को सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

आज सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा पूरे दिन और रात कर्क राशि में संचरण करेगा। ग्रहों की यह स्थिति ज्योतिष की दृष्टि से दिन को विशेष बनाती है।

  • सूर्योदय: सुबह 06:23 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 06:06 बजे
  • चंद्रोदय: रात 12:53 बजे
  • चंद्रास्त: दोपहर 02:43 बजे
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चंद्र राशि: कर्क

अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

5 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त

आज कई शुभ काल बन रहे हैं। इनमें अभिजीत मुहूर्त, अमृत काल और ब्रह्म मुहूर्त प्रमुख हैं।

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
  • अमृत काल: शाम 05:01 बजे से शाम 06:33 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:47 बजे से सुबह 05:35 बजे तक

इन शुभ समयों का उपयोग पूजा, ध्यान, आध्यात्मिक साधना और अन्य शुभ कार्यों के लिए किया जा सकता है।

5 अक्टूबर 2026 का राहुकाल

आज सोमवार होने के कारण राहुकाल सुबह के समय रहेगा।

  • राहुकाल: सुबह 07:51 बजे से सुबह 09:19 बजे तक
  • यम गण्ड: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
  • कुलिक काल: दोपहर 01:43 बजे से दोपहर 03:11 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:38 बजे से दोपहर 01:25 बजे तक और दोपहर 02:59 बजे से दोपहर 03:46 बजे तक
  • वर्ज्यम्: सुबह 07:51 बजे से सुबह 09:23 बजे तक

राहुकाल और अन्य अशुभ काल में नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की परंपरा रही है। हालांकि, पूजा-पाठ और नियमित धार्मिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव अलग-अलग परंपराओं में अलग माना जाता है।

आज क्या करें?

5 अक्टूबर को सोमवार होने के साथ-साथ पितृ पक्ष की दशमी तिथि भी है। इसलिए आज भगवान शिव की पूजा करने के साथ पितरों का स्मरण और तर्पण करना विशेष माना जाता है।

सुबह स्नान के बाद भगवान शिव को जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करें। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।

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पितृ पक्ष के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और सम्मान है। इसलिए किसी भी कर्मकांड को दिखावे के बजाय श्रद्धापूर्वक करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

5 अक्टूबर 2026 पंचांग का महत्व

आज का दिन पितृ पक्ष, दशमी श्राद्ध और सोमवार के संयोग के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर भगवान शिव की आराधना से दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने की परंपरा है।

इसलिए आज पूजा, ध्यान, शिव आराधना और पितरों के स्मरण के लिए दिन विशेष माना जा सकता है।

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नोट: यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों, स्थानों और पंचांग गणना पद्धतियों के अनुसार तिथि, मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ अंतर हो सकता है। धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग की पुष्टि करना उचित रहेगा।

Astro Rishi

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