आज 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज इंदिरा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। साथ ही, पितरों की शांति के लिए द्वादशी श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व होता है।
इंदिरा एकादशी व्रत का पारण आज सुबह 06:17 बजे से 08:38 बजे तक किया जा सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस अवधि में पारण कर सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। ऐसे में अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
आज चंद्रमा पूरे दिन सिंह राशि में रहेगा। वहीं, रात 09:40 बजे तक मघा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। इसके अलावा, सुबह 04:59 बजे से शुभ योग बन रहा है। यह योग पूरे दिन रहने वाला है।
बुधवार होने के कारण आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं रहेगा। हालांकि, ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल जैसे शुभ समय मौजूद रहेंगे। दूसरी ओर, राहुकाल और अन्य अशुभ काल में महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आइए जानते हैं 7 अक्टूबर 2026 का पूरा पंचांग। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, ग्रह स्थिति, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और करण की जानकारी शामिल है।
7 अक्टूबर 2026 का पंचांग
तिथि: आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रात 11:16 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी।
वार: बुधवार।
व्रत और धार्मिक अवसर: इंदिरा एकादशी व्रत का पारण और द्वादशी तिथि का श्राद्ध।
ग्रह स्थिति: चंद्रमा पूरे दिन सिंह राशि में रहेगा।
नक्षत्र: रात 09:40 बजे तक मघा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा।
योग: सुबह 04:59 बजे से शुभ योग शुरू होगा। इसके बाद यह पूरे दिन रहेगा।
इंदिरा एकादशी व्रत का पारण आज
पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, यह व्रत पितरों की शांति और मुक्ति की कामना से भी जुड़ा हुआ है।
6 अक्टूबर को रखे गए इंदिरा एकादशी व्रत का पारण आज किया जाएगा। पारण का समय सुबह 06:17 बजे से 08:38 बजे तक बताया गया है। व्रत रखने वाले लोग पूजा और भगवान विष्णु का स्मरण करने के बाद इस अवधि में पारण कर सकते हैं।
हालांकि, पारण का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग को जरूर देखें।
आज किया जाएगा द्वादशी श्राद्ध
आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि होने के कारण आज द्वादशी श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन पितरों का निधन किसी भी महीने की द्वादशी तिथि को हुआ हो, उनके लिए द्वादशी श्राद्ध किया जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण करके उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
इसके साथ ही, अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। श्राद्ध की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी योग्य आचार्य या स्थानीय पंचांग से विधि की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
आज के सूर्य और चंद्रमा के समय
सूर्योदय: सुबह 06:24 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:05 बजे
चंद्रोदय: देर रात 02:59 बजे
चंद्रास्त: शाम 04:02 बजे
ध्यान रखें कि सूर्य और चंद्रमा के उदय तथा अस्त होने के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए स्थानीय समय को प्राथमिकता दें।
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:48 बजे से 05:36 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: आज उपलब्ध नहीं है
अमृत काल: शाम 07:18 बजे से रात 08:52 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त को आध्यात्मिक साधना और पूजा के लिए शुभ माना जाता है। वहीं, अमृत काल को भी कई धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
हालांकि, किसी विशेष शुभ कार्य के लिए केवल एक मुहूर्त देखना पर्याप्त नहीं होता। कार्य और स्थान के अनुसार अन्य पंचांग तत्वों को भी देखा जा सकता है।
आज के अशुभ काल
राहुकाल: दोपहर 12:14 बजे से 01:42 बजे तक
यमगंड: सुबह 07:52 बजे से 09:19 बजे तक
कुलिक काल: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
वर्ज्यम: सुबह 09:58 बजे से 11:31 बजे तक
वर्ज्यम: सुबह 05:33 बजे से 07:08 बजे तक
ज्योतिषीय और धार्मिक परंपराओं में राहुकाल तथा अन्य अशुभ समय को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए नए और विशेष कार्यों के लिए इन समयों से बचने की सलाह दी जाती है।
फिर भी, रोजमर्रा के सामान्य कार्यों पर इसका कोई अनिवार्य प्रभाव नहीं माना जाता। मुहूर्त का उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक और महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के समय का चयन करने के लिए किया जाता है।
आज के करण
कौलव: 6 और 7 अक्टूबर की रात 12:35 बजे से 7 अक्टूबर की सुबह 11:54 बजे तक।
तैतिल: सुबह 11:54 बजे से रात 11:17 बजे तक।
गर: रात 11:17 बजे से 8 अक्टूबर की सुबह 10:44 बजे तक।
करण पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक है। तिथि के साथ करण की स्थिति भी देखी जाती है। इसके आधार पर धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए समय का विचार किया जाता है।
7 अक्टूबर 2026 को क्या करें?
आज इंदिरा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। इसलिए भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
पितृ पक्ष होने के कारण पितरों का स्मरण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा, जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान दिया जा सकता है।
अगर परिवार में श्राद्ध की परंपरा है, तो आज द्वादशी श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है। इसके लिए परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि का पालन करना बेहतर रहेगा।
आज के पंचांग का धार्मिक महत्व
7 अक्टूबर 2026 का दिन कई कारणों से खास है। एक ओर आज इंदिरा एकादशी व्रत का पारण होगा। दूसरी ओर, द्वादशी तिथि के कारण पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।
इसी वजह से आज भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का स्मरण करने का विशेष अवसर माना जा सकता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा, प्रार्थना, दान और धार्मिक कार्य कर सकते हैं।
साथ ही, आज चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। मघा नक्षत्र के बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। सुबह से शुभ योग भी बना रहेगा।
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निष्कर्ष
7 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज इंदिरा एकादशी व्रत का पारण होगा। साथ ही, द्वादशी तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।
आज मघा नक्षत्र के बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। वहीं, शुभ योग पूरे दिन रहेगा। इसके अलावा, ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल जैसे शुभ समय भी रहेंगे।
इसलिए यदि आप आज कोई पूजा, व्रत पारण या धार्मिक कार्य करने जा रहे हैं, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार समय जरूर जांच लें। शहर के अनुसार मुहूर्त और ग्रहों से जुड़े समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
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Disclaimer
यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों, पंचांगों और गणना पद्धतियों के अनुसार समय में अंतर संभव है। इसलिए किसी विशेष पूजा, व्रत, श्राद्ध या शुभ कार्य के लिए अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।

