चैत्र नवरात्र 2026 इस बार एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आ रहा है। लगभग 70+ वर्षों बाद ऐसा योग बन रहा है जब अमावस्या और प्रतिपदा तिथि एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे यह नवरात्र और भी विशेष बन जाता है।
चैत्र अमावस्या और नवरात्र 2026 तिथि
- अमावस्या प्रारंभ: 18 मार्च 2026, सुबह 8:25 बजे
- अमावस्या समाप्त: 19 मार्च 2026, सुबह 6:52 बजे
- प्रतिपदा प्रारंभ: 19 मार्च 2026, सुबह 6:52 बजे
- प्रतिपदा समाप्त: 20 मार्च 2026, सुबह 4:52 बजे
ज्योतिषीय दृष्टि से:
अमावस्या से प्रतिपदा का यह संक्रमण ऊर्जा परिवर्तन का प्रतीक है। यह समय साधना, संकल्प और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

स्नान-दान मुहूर्त (Amavasya Snan Daan)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
👉 इस समय गंगाजल से स्नान और दान करने से पितृ दोष शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
कलश स्थापना शुभ मुहूर्त (Ghatasthapana Muhurat)
- प्रातः मुहूर्त: 6:52 AM – 7:43 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 12:05 PM – 12:53 PM
सुविच ज्योतिष अनुसार:
कलश स्थापना हमेशा स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया में करनी चाहिए ताकि पूरे 9 दिनों तक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

कलश स्थापना विधि (Step-by-Step)
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें
- चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं
- मिट्टी में जौ बोएं (समृद्धि का प्रतीक)
- तांबे/मिट्टी के कलश में जल भरें
- उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्का डालें
- आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें
- दीपक जलाकर माँ दुर्गा का आवाहन करें
🔱 ज्योतिषीय महत्व:
जौ बोना वृद्धि और उन्नति, और नारियल शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है।
इस बार का विशेष योग क्यों है खास?
- अमावस्या + प्रतिपदा का संयोग
- आध्यात्मिक ऊर्जा का उच्च स्तर
- नए कार्यों और संकल्प के लिए उत्तम समय
- देवी उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है

