Mahashivratri 2026 Kab Hai:
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर यह पावन पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का शुभ पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने 108 बार जन्म लिया था?
यह कथा जितनी अद्भुत है, उतनी ही गूढ़ और रहस्यमयी भी।
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महाशिवरात्रि 2026 का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन शिव और शक्ति का पावन विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन व्रत, रुद्राभिषेक और शिव आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत करता है, उस पर महादेव और माता पार्वती की कृपा सदैव बनी रहती है।
कथा के अनुसार: 108 जन्मों का रहस्य
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव की अर्धांगिनी बनने के लिए 108 जन्म लिए। अपने 108वें जन्म में उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में अवतार लिया।
इससे पहले वे प्रजापति दक्ष के घर कन्या के रूप में जन्मी थीं, जहाँ उन्होंने प्रेम और भक्ति के माध्यम से भगवान शिव से विवाह किया था। हालांकि, दक्ष की इच्छा थी कि उनकी पुत्री का विवाह भगवान विष्णु से हो।
लेकिन पार्वती जी ने स्पष्ट कहा कि उनका वास्तविक सुख और जीवन उद्देश्य केवल महादेव में ही निहित है।

जब प्रेम बना त्याग और बलिदान
दक्ष को शिव जी से यह प्रेम स्वीकार नहीं था। इसी विरोध के चलते उन्होंने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जानबूझकर अपनी पुत्री और दामाद को नहीं बुलाया।
फिर भी, पार्वती जी बिना बुलाए यज्ञ में पहुँचीं। वहाँ शिव जी का अपमान सहन न कर पाने के कारण, उन्होंने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए।
जब यह समाचार शिव जी तक पहुँचा, तो वे क्रोध से भर उठे। उन्होंने अपने जटाओं से वीरभद्र को उत्पन्न किया और दक्ष का सिर कटवा दिया। इसके बाद महादेव वर्षों तक विरक्त अवस्था में तप में लीन रहे।
108वां जन्म और कठोर तपस्या
इसके बाद माता पार्वती ने पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्म लिया। यही उनका 108वां और अंतिम जन्म था। देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में, किशोरी पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या का संकल्प लिया।
उन्होंने जंगल में जाकर सब कुछ त्याग दिया और वर्षों तक कठिन तप किया। अंततः उनकी भक्ति, त्याग और दृढ़ संकल्प से भगवान शिव प्रसन्न हुए।

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुआ शिव-पार्वती विवाह
अंततः फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। यही कारण है कि यह तिथि महाशिवरात्रि के रूप में पूजनीय मानी जाती है।
क्यों खास है महाशिवरात्रि 2026?
महाशिवरात्रि 2026 न केवल व्रत और पूजा का दिन है, बल्कि यह प्रेम, धैर्य, त्याग और भक्ति की सर्वोच्च मिसाल भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और तप से असंभव भी संभव हो जाता है।
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Disclaimer:
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और सामान्य जनश्रुतियों पर आधारित है। Suvich – The Real Astrology इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता।

