Why Do We Use Right Hand For Blessings:
भारतीय संस्कृति में आशीर्वाद लेना और देना केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक और ऊर्जात्मक विज्ञान है। आपने अक्सर देखा होगा कि पूजा-पाठ, विवाह, यज्ञ या किसी भी मांगलिक कार्य के बाद बड़े-बुजुर्ग हमेशा दाहिने हाथ से ही आशीर्वाद देते हैं। लेकिन आखिर ऐसा क्यों? क्या इसके पीछे केवल परंपरा है, या फिर वास्तविक ज्योतिष और योग विज्ञान का भी आधार है?
आइए, इस विषय को सुविचार (Suvichar) और वास्तविक ज्योतिषीय दृष्टिकोण से समझते हैं।

1️⃣ ज्योतिष के अनुसार दाहिने हाथ का महत्व
वास्तविक वैदिक ज्योतिष के अनुसार मानव शरीर पंचतत्व और नवग्रहों की ऊर्जा से प्रभावित होता है।
- दाहिना भाग मुख्यतः सूर्य (Surya) ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है।
- सूर्य आत्मा, तेज, जीवन शक्ति और सकारात्मकता का कारक ग्रह है।
- कुंडली में सूर्य मजबूत हो तो व्यक्ति आत्मविश्वासी, प्रभावशाली और ऊर्जावान होता है।
इसीलिए जब कोई व्यक्ति दाहिने हाथ से आशीर्वाद देता है, तो प्रतीकात्मक रूप से वह अपनी सौर ऊर्जा (Solar Energy) और शुभ संकल्प सामने वाले को प्रदान करता है।
इसके अलावा, दान, दक्षिणा, संकल्प और आशीर्वाद जैसे कर्म दाहिने हाथ से करने का विधान भी धर्मशास्त्रों में बताया गया है।
2️⃣ योग विज्ञान और पिंगला नाड़ी का संबंध
योग शास्त्र में शरीर में तीन मुख्य नाड़ियां मानी गई हैं:
- इड़ा नाड़ी (बायां भाग – चंद्र ऊर्जा)
- पिंगला नाड़ी (दाहिना भाग – सूर्य ऊर्जा)
- सुषुम्ना नाड़ी (मध्य भाग)
दाहिना हाथ पिंगला नाड़ी से संबंधित है, जो सक्रियता, ऊर्जा और क्रियाशीलता का प्रतीक है।
जब दाहिने हाथ से किसी के सिर पर स्पर्श किया जाता है, तो यह केवल आशीर्वाद नहीं बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा ट्रांसफर (Energy Transfer) की प्रक्रिया मानी जाती है। इसलिए धार्मिक कार्यों में दाहिने हाथ का प्रयोग अधिक शुभ और प्रभावी माना गया है।

3️⃣ धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यत
धार्मिक मान्यता के अनुसार:
- दाहिना भाग “कर्म” और “शक्ति” का प्रतीक है।
- बायां भाग “शांति” और “भावना” का प्रतिनिधित्व करता है।
यही कारण है कि आशीर्वाद, तिलक, हवन आहुति, दान, मंत्र संकल्प आदि सभी कार्य दाहिने हाथ से किए जाते हैं।
इस प्रकार, दाहिने हाथ का उपयोग केवल परंपरा नहीं बल्कि ऊर्जा और संकल्प की शुद्धता से जुड़ा हुआ है।
4️⃣ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कारण
अब यदि इसे वैज्ञानिक नजरिए से देखें, तो:
- अधिकांश लोग right-handed होते हैं, जिससे उनका दाहिना हाथ अधिक नियंत्रित और शक्तिशाली होता है।
- आशीर्वाद देते समय स्पर्श के माध्यम से मनोवैज्ञानिक प्रभाव (Psychological Impact) पड़ता है।
- जब बड़े स्नेह और सकारात्मक भावना से सिर पर हाथ रखते हैं, तो सामने वाले व्यक्ति में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
अर्थात, यह परंपरा मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा को मजबूत करने का भी माध्यम है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस प्रकार, दाहिने हाथ से आशीर्वाद देने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैदिक ज्योतिष, योग विज्ञान और मनोविज्ञान का गहरा संबंध है।
दाहिना हाथ सूर्य और पिंगला नाड़ी से जुड़ा होने के कारण ऊर्जा, तेज और सकारात्मकता का प्रतीक है। इसलिए आशीर्वाद, दान और संकल्प जैसे शुभ कार्य दाहिने हाथ से ही किए जाते हैं।

