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Surya Grahan 2026: 12 अगस्त अमावस्या पर सूर्य ग्रहण, जानें सूतक और पूजा नियम

Surya Grahan 2026: 12 अगस्त 2026 को सावन की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या है। इसी दिन साल का पूर्ण सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों के मन में ग्रहण, सूतक काल और पूजा-पाठ को लेकर कई सवाल हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। दिल्ली समेत भारत के कई शहरों के लिए ग्रहण की दृश्यता नहीं है और वहां सूतक काल भी मान्य नहीं माना गया है।

वहीं, अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। इसलिए पितृ तर्पण, दान और अमावस्या से जुड़े धार्मिक कार्य इसी दिन किए जा सकते हैं।

12 अगस्त 2026 को क्यों खास है?

12 अगस्त का दिन दो वजहों से खास है। पहली, इस दिन सावन अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या मनाई जा रही है। दूसरी, इसी तारीख को सूर्य ग्रहण हो रहा है।

हरियाली अमावस्या को प्रकृति, पितरों और धार्मिक साधना से जोड़कर देखा जाता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन शिव आराधना, दान, पितृ तर्पण और पौधारोपण का विशेष महत्व माना जाता है।

पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त को अमावस्या तिथि रात 11:06 बजे तक रहेगी।

Surya Grahan 2026: क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?

12 अगस्त 2026 को होने वाला सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से पूर्ण सूर्य ग्रहण है। हालांकि इसकी दृश्यता स्थान के अनुसार अलग-अलग रहेगी।

भारत के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली और भारत के कई हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग विवरण में ग्रहण की दृश्यता नहीं है और सूतक भी लागू नहीं बताया गया है।

इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण को लेकर अनावश्यक डर या भ्रम रखने की जरूरत नहीं है।

क्या भारत में सूर्य ग्रहण का सूतक लगेगा?

सूर्य ग्रहण के साथ सूतक काल को लेकर सबसे ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं।

परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं में आम तौर पर दृश्य ग्रहण वाले क्षेत्र में ही सूतक के नियम लागू माने जाते हैं। चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए दिल्ली सहित भारत के लिए सूतक काल लागू नहीं माना गया है।

हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में धार्मिक परंपराएं अलग हो सकती हैं। यदि आपके घर में ग्रहण को लेकर कोई विशेष परंपरा चली आ रही है, तो उसका पालन अपने परिवार की मान्यता के अनुसार किया जा सकता है।

अमावस्या पर क्या करें?

हरियाली अमावस्या को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखें। इस दिन किए गए छोटे-छोटे अच्छे काम भी आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

1. भगवान शिव की पूजा करें

सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें। संभव हो तो शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें और बेलपत्र चढ़ाएं।

इसके बाद श्रद्धा से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

मंत्र जाप के साथ मन में किसी एक बुरी आदत को छोड़ने का संकल्प लेना भी अच्छा माना जाता है। जैसे क्रोध, अहंकार, आलस्य या नकारात्मक सोच।

2. पितृ तर्पण करें

अमावस्या को पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

यदि आप नियमित रूप से पितृ तर्पण करते हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंडित की सलाह के अनुसार यह कर्म कर सकते हैं।

यदि विस्तृत विधि का ज्ञान नहीं है, तो बिना जानकारी के कोई जटिल अनुष्ठान करने के बजाय श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करें और जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या वस्तुओं का दान करें।

3. दान-पुण्य करें

अमावस्या के दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें।

आप भोजन, कपड़े, अनाज या अपनी जरूरत के अनुसार किसी उपयोगी वस्तु का दान कर सकते हैं।

दान का उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद की सहायता और अपनी नकारात्मक आदतों पर नियंत्रण करना भी होना चाहिए।

4. पौधा लगाएं

हरियाली अमावस्या का संबंध प्रकृति और हरियाली से भी माना जाता है।

इस दिन अपनी सुविधा के अनुसार कोई पौधा लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लें। केवल पौधा लगाना ही नहीं, बल्कि उसे बड़ा होने तक पानी देना और उसकी रक्षा करना भी जरूरी है।

नीम, पीपल, बरगद, आंवला, बेल या स्थानीय वातावरण के अनुकूल कोई पौधा लगाया जा सकता है।

आर्थिक परेशानियों के लिए अमावस्या के सरल उपाय

अगर आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है, तो अमावस्या के दिन कुछ सकारात्मक संकल्प ले सकते हैं।

  • घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
  • शाम को घर के मुख्य द्वार के पास दीपक जलाएं।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या उपयोगी वस्तु का दान करें।
  • अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने का संकल्प लें।
  • घर और कार्यस्थल में टूटी या बेकार वस्तुओं को हटाएं।
  • माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।

इन उपायों को किसी चमत्कार की गारंटी के रूप में नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, अनुशासन और आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में अपनाना बेहतर है।

सूर्य ग्रहण के दिन क्या करें?

क्योंकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाले लोगों के लिए सामान्य दिनचर्या और धार्मिक गतिविधियों पर ग्रहण संबंधी रोक लागू नहीं मानी जाती।

आप चाहें तो इस दिन:

  • मंत्र जाप कर सकते हैं।
  • ध्यान और प्रार्थना कर सकते हैं।
  • भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
  • पितरों का स्मरण कर सकते हैं।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर सकते हैं।
  • प्रकृति की सेवा के लिए पौधा लगा सकते हैं।

यदि आप किसी दूसरे देश में रहते हैं जहां यह ग्रहण दिखाई देता है, तो वहां के स्थानीय पंचांग के अनुसार ग्रहण और सूतक का समय अलग हो सकता है।

Suvich की सलाह

अमावस्या और सूर्य ग्रहण जैसे अवसरों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें वायरल होती रहती हैं। इसलिए हर जानकारी पर आंख बंद करके विश्वास करने के बजाय अपने स्थान के पंचांग और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेना बेहतर है।

12 अगस्त 2026 की अमावस्या को डर या भ्रम का दिन न बनाएं। इसे आत्मचिंतन, शिव आराधना, पितरों के स्मरण, दान और प्रकृति की सेवा के अवसर के रूप में देखें।

धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं। पूजा और उपाय अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही करें।

Astro Rishi

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